Saturday, July 19, 2008

चार सौ बीस - एपिसोड 46

"ऐसे तो सारे मकान हैं लगभग. बस एक जगह मैं ने किराया दिया था. बल्कि एक झोंपडी थी जिसकी मालिक एक बुढ़िया थी. जब मैं ने उससे कहा कि मैं तीन महीने से रहने कि जगह खोज रहा हूँ तो उसने अपनी कुटिया में रहने का प्रबंध कर दिया था." हंसराज ने बताया.
"इसका मतलब ये हुआ कि कभी कभी तुम भी लोगों पर रहम कर जाते हो." सोनिया बोली.
"मेरे सीने में भी दिल है. और उसमें भावनाएं भी हैं. लेकिन दुनिया ने मुझे ठग बना दिया. एक समय था जब मैं एक शरीफ आदमी था.किसी का एक पैसा लेना पाप समझता था. लेकिन उस वक़्त मुझे अधिकतर भूखों सोना पड़ता था. लोगों ने मुझ से मजदूरी कराकर अपने पेट में तर माल डाला और मुझे बिना पगार दिए दुत्कार दिया." हंसराज का स्वर वेदनाओं से भरा हुआ था. सोनिया भी पूरी तरह गंभीर हो गई थी.
"फिर तुमने ठगी कैसे शुरू कर दी?" सोनिया ने पूछा.
"एक बार मजमे में किसी जेबकतरे ने किसी व्यक्ति का पर्स उड़ा लिया था. उस व्यक्ति को पता चल गया और उसने शोर मचा दिया. वहां मौजूद पुलिस ने बाहर जाने के सरे दरवाज़े बंद कर दिए और तलाशी लेनी शुरू कर दी. जब पर्स उडाने वाले ने देखा कि वो पकड़ा जाएगा तो उसने वह पर्स मेरी जेब में डाल दिया. पुलिस ने मेरी तलाशी ली और मैं जेल में डाल दिया गया. वहां मेरी भेंट सत्तर साल के कैदी उस्ताद गंगू से हुई. उसने मुझे ठगी के अनेकों गुर सिखाए. और जब मैं जेल से बाहर आया तो पूरी तरह ठग बन चुका था." हंसराज अपनी दास्तान पूरी करके चुप हो गया. कुछ देर वहां सन्नाटा छाया रहा. फिर हंसराज दोबारा बोला, " अच्छा अब छोड़ो इन बातों को. आज तैयार रहना, हमें पैसों का इन्तिजाम करने के लिए चलना है. मैं तुम्हें पूरी प्लानिंग समझा देता हूँ."
"ठीक है. तो इसका मतलब ये हुआ कि आज रात कुछ एडवेंचर होगा." सोनिया ने कंधे सिकोड़कर कहा.
..........continued

2 comments:

seema gupta said...

हमें पैसों का इन्तिजाम करने के लिए चलना है. मैं तुम्हें पूरी प्लानिंग समझा देता हूँ."
"ठीक है. तो इसका मतलब ये हुआ कि आज रात कुछ एडवेंचर होगा." सोनिया ने कंधे सिकोड़कर कहा

" Ah! waiting for another epesode"

महामंत्री-तस्लीम said...

उस एडवेंचर की हमें भी प्रतीक्षा है।