Thursday, May 29, 2008

चार सौ बीस - एपिसोड 37

कंट्रोल रूम में खलबली मची थी.
और न केवल कंट्रोल रूम बल्कि पोर्ट्रेट से संबंधित सभी सरकारी विभागों के बड़े अफसर हतप्रभ थे. क्योंकि अब तक ये मालुम हो चुका था कि असली पोर्ट्रेट की चोरी हो चुकी है. और आर्ट गैलरी में रखा पोर्ट्रेट नकली है.
ये बात अभी केवल बड़े अधिकारियों तक सीमित रखी गई थी. क्योंकि ये ख़बर लीक होने का अर्थ था, पूरे विश्व में देश की बदनामी होना.
प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था के मुखिया आई. जी. राघवेन्द्र की आयु हालांकि पचास को पार कर रही थी, किंतु किसी भी दशा में वो चालीस से अधिक का नही लगता था. और ये उसके नियमित व्यायाम का कमाल था कि इस आयु में भी उसके शरीर की चुस्ती फुर्ती जवानों को भी मात करती थी.
इस समय वो इंसपेक्टर दिनेश के साथ अपने चैंबर में बैठा था. उसके मस्तक की लकीरें बता रही थीं कि या तो वो किसी सोच में डूबा है या चिंतित है. इं. दिनेश उसे पोर्ट्रेट चोरी का पूरा विवरण बता चुका था.
"तो इसका अर्थ हुआ कि अगर वो अज्ञात फोन न आता तो हम पोर्ट्रेट की चोरी से पूरी तरह बेखबर रहते. फिर या तो नकली पोर्ट्रेट इटली पहुँच जाता या फिर पब्लिक को हम से पहले इस चोरी का पता चल जाता." इं. दिनेश के चेहरे पर नज़रें गडाकर आई. जी. राघवेन्द्र ने कहा.
"लेकिन वो अज्ञात फोन किसका हो सकता है?" इं. दिनेश ने अपने आप से प्रश्न किया.
"मेरी दृष्टि में उस व्यक्ति के लिए तीन संभावनाएं हैं. एक तो ये कि वो आर्ट गैलरी का कोई जानकार दर्शक हो सकता है. जिसने असली और नकली पोर्ट्रेट का अन्तर मालुम कर लिया हो. फिर उसने हमें इन्फोर्म किया हो. दूसरी सम्भावना ये है कि फोन ख़ुद पोर्ट्रेट चुराने वाले ने किया हो और वह उसकी वापसी के लिए हमसे मामला करना चाहता हो.
और तीसरी बात ये हो सकती है कि पोर्ट्रेट चुराने का काम किसी गिरोह का हो और बाद में उस गिरोह का कोई व्यक्ति किसी कारणवश अलग होकर मुखबिरी करना चाहता हो." आई. जी ने अपनी बात पूरी की और मेज़ का पेपरवेट उँगलियों के बीच नचाने लगा.
"सही बात क्या है, ये तो हमें तभी मालुम हो सकेगा जब उसका दूसरा फोन आयेगा. जैसा कि उसने कहा है कि वो दूसरा फोन करेगा. " इं. दिनेश बोला.
"ठीक है. उसके फोन कि प्रतीक्षा करनी चाहिए. लेकिन साथ ही ये पता लगाना ज़रूरी है कि पोर्ट्रेट चोरी कैसे हुआ."
"इस बारे में आपका क्या विचार है?" इं. दिनेश ने पूछा.
.........continued

1 comment:

महामंत्री (तस्लीम ) said...

आपका यह धारावाहिक काफी रूचिकर औरमनोरंजक है। जिज्ञासा है कि आगे इसमें और कौन कौन से मोड आते हैं।