उसने फोन उठाया और फिर दूसरी तरफ़ की आवाज़ सुनते ही वो सावधान की मुद्रा में आ गया.
"क्या रहा?" दूसरी ओर से पूछा गया.
"काम हो गया बास. पोर्ट्रेट इस समय मेरे पास मौजूद है." वह बोला.
"गुड. अब ध्यान से सुनो. मि. एडगर कुछ ही देर में तुम्हारे पास पहुँचने वाले हैं. उनके साथ कलाकृतियों का एक एक्सपर्ट भी होगा, जो उस पोर्ट्रेट को चेक करेगा. उसकी संतुष्टि के बाद तुम मि. एडगर से ब्रीफकेस ले लेना जिसमें दस लाख डॉलर के नोट होंगे. उन्हें गिनने के बाद पोर्ट्रेट मि. एडगर को दे देना."
"ऐसा ही होगा बास. एक बात और आप से कहनी है."
"क्या बात है? उधर से पूछा गया.
"ये गंगाराम अपने पर फैलाने की कोशिश कर रहा है. क्या उसे ठिकाने लगा दिया जाये?"
"अभी उसे रहने दो. वक्त आने पर उसका इन्तिजाम हो जाएगा." कहने के साथ ही दूसरी ओर से कनेक्शन काट दिया गया.
......................
ये कंट्रोल रूम था.
जिसका सीधा सम्पर्क टी.वी. द्वारा आर्ट गैलरी से था. और यहाँ तीन ऑपरेटरों को केवल इसलिए रखा गया था कि वे हर पल लेओनार्दो के पोर्ट्रेट पर दृष्टि रखें.
इसके अलावा किसी भी इमर्जेंसी से निपटने के लिए बीस कमांडो की रैपिड एक्शन फोर्स वहाँ तैनात थी.
इस समय दो ओप्रेटर टी.वी. के सामने बैठे आर्ट गैलरी की हलचलों को देख रहे थे.
उसी समय वहाँ रखे फोन की घंटी घनघनाने लगी. वहाँ उपस्थित इं. दिनेश ने फोन उठाया.
"हेलो." वो बोला.
"क्या ये आर्ट गैलरी का कंट्रोल रूम है?" दूसरी ओर से पूछा गया.
"जी हाँ. आप कौन हैं?"
"मेरे बारे में जानना आपके लिए बेकार है. फिलहाल आप मेरी सूचना ध्यान से सुनें. वो ये है की आर्ट गैलरी में रखा पोर्ट्रेट नकली है. असली चोरी हो चुका है."
......continued
Tuesday, April 29, 2008
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